ड्रोन निगरानी के दावों की खुली पोल! बेलतरा के कछार में धड़ल्ले से अवैध खनन, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
बिलासपुर, 13 जून 2026. छत्तीसगढ़ में अवैध रेत उत्खनन को रोकने के प्रशासनिक और तकनीकी दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कछार, सेंदरी और लोफंदी में बेखौफ चल रहे अवैध रेत खनन ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की कलई खोल दी है। ग्राम कछार निवासी किसान सावन खांडे द्वारा बिलासपुर कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र ने इस पूरे नेक्सस को बेनकाब कर दिया है।
विरोध करने पर किसान से मारपीट, कोनी थाने में FIR के बाद भी माफिया बेखौफ
किसान सावन खांडे का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि के ठीक पास बहने वाली अरपा नदी से बेधड़क रेत निकाली जा रही है। जब उन्होंने अपनी जमीन को बचाने के लिए इस अवैध उत्खनन का विरोध किया, तो खनिज माफियाओं ने उनके साथ जमकर मारपीट की। इस मामले में कोनी थाने में बाकायदा प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है। इसके बावजूद माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि किसान की भूमि को लगातार नुकसान पहुंचाते हुए अवैध उत्खनन का खेल चौबीसों घंटे जारी है।


‘सुशासन तिहार’ से लेकर SP-कलेक्टर तक गुहार, नतीजा शून्य
पीड़ित किसान और ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि न्याय के लिए उन्होंने हर दरवाजा खटखटाया है। कोनी थाना और जिला प्रशासन को बार-बार अवगत कराया गया। कलेक्टर और एसपी को लिखित आवेदन सौंपे गए। यहाँ तक कि मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम में भी शिकायत दर्ज कराई गई। लेकिन इतने स्तरों पर शिकायत के बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जो प्रशासनिक सुस्ती को बयां करती है।

मुख्यमंत्री, राज्यपाल और खनिज सचिव के कड़े निर्देश बेअसर
यह स्थिति तब है जब प्रदेश के मुखिया (मुख्यमंत्री) स्वयं अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के सख्त निर्देश दे चुके हैं। महामहिम राज्यपाल भी राज्य में अवैध उत्खनन के मामलों पर चिंता जताते हुए संज्ञान ले चुके हैं। वहीं, खनिज सचिव ने ड्रोन के माध्यम से हाईटेक निगरानी कर अवैध खनन पर अंकुश लगाने का बड़ा दावा किया था। लेकिन कछार गांव की जमीनी हकीकत देखकर यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ये तमाम निर्देश और घोषणाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं?
स्थानीय विधायक की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में क्षेत्रवासियों की नाराजगी बेलतरा विधानसभा के स्थानीय विधायक के प्रति भी फूट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब अन्नदाताओं की जमीन, स्थानीय पर्यावरण और जीवनदायिनी अरपा नदी का अस्तित्व खतरे में है, तब क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को खुलकर सामने आना चाहिए था। जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है कि आखिर इस गंभीर मुद्दे पर स्थानीय विधायक ने अब तक क्या पहल की है और वे मौन क्यों हैं?

“यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर विफलता” — अंकित गौराहा
इस मामले को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
“जब देश के अन्नदाता को कोनी थाना, कलेक्टर कार्यालय और सुशासन तिहार तक के चक्कर काटने पड़ें और फिर भी न्याय न मिले, तो यह प्रशासनिक तंत्र की पूरी तरह से विफलता है। शासन के सर्वोच्च पदों (मुख्यमंत्री व राज्यपाल) से निर्देश जारी होने के बाद भी यदि जमीनी स्तर पर माफिया राज चल रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की जवाबदेही तुरंत तय होनी चाहिए।”
गौराहा ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार अवैध खनन रोकने के जितने भी बड़े दावे कर रही है, ग्राम कछार की तस्वीरें उन दावों का सच उजागर करने के लिए काफी हैं। अगर शिकायतों के बाद भी तंत्र सोया रहेगा, तो जनता का इस व्यवस्था से विश्वास उठना तय है।










